कल हमने
एक रात बिताई रे ,
एक रात बिताई रे ,
संग अपने थे,
साथी, सर्दी, चाँद रजाई रे.
मुई गर्मी भी ठिठुर गई
कोहरे ने कर दी
धरती की यूँ गोद भराई रे.पत्ता भी कहीं कोई
एक हिले तो लगे
छुरी तेज़ कसाई रे.
अकेलेपन का अहसास
आद्या के लिए
नींद का अब हर रात इस दर पे आना बंद हुआ
देखें तो हर झूठ में कुछ सच नज़र आता है,
कुम्भ के साधू सा थके हैं दिनभर, अब घर जायेंगे
वो बात